Friday, January 22, 2010

गूगल आरती

ॐ जय गूगल हरे, स्वामी जय गूगल हरे
फ़्रस्ट (frust[rated]) जनों के संकट, त्रस्त जनों के संकट
क्लिक में दूर करे
ॐ जय गूगल हरे…
जो ध्यावै सो पावै
दूर होवै शंका, स्वामी दूर होवै शंका
सब इन्फ़ो (info[rmation]) घर आवै, सब इन्फ़ो घर आवै
कष्ट मिटै मन का
ॐ जय गूगल हरे…
नेट पिता तुम मेरे
शरण गहूं किसकी, स्वामी शरण गहूं किसकी
तुम बिन और न दूजा, तेरे बिन और न दूजा
होप करूं किसकी
ॐ जय गूगल हरे…
तुम पूरन हो खोजक
तुम वेबसाइटयामी, स्वामी तुम वेबसाइटयामी
पार नेट परमेश्वर, पार नेट परमेश्वर
तुम सबके स्वामी
ॐ जय गूगल हरे…
तुम आई.टी. के फ़ादर
तुम ही इक सर्चा, स्वामी तुम ही इक सर्चा
मैं मूरख हूं सर्चर, मैं मूरख हूं सर्चर
कृपा करो भरता
ॐ जय गूगल हरे…
तुम सर्वर के सर्वर
सबके डाटापति, स्वामी सबके डाटापति
किस विधि एन्टर मारूं, किस विधि एन्टर मारूं
तुममें मैं कुमति
ॐ जय गूगल हरे…
दीनबंधु दु:खहर्ता
खोजक तुम मेरे, स्वामी शोधक तुम मेरे
अपने फ़ण्डे दिखाओ, एल्गोऽरिथम लगाओ
साइट खड़ा तेरे
ॐ जय गूगल हरे…
इग्नोरेंस मिटाओ
टेंशन हरो देवा, स्वामी टेंशन हरो देवा
गूगल अकाउण्ट बनाओ
और खाओ मेवा
ॐ जय गूगल हरे…
ॐ जय गूगल हरे, स्वामी जय गूगल हरे
फ़्रस्ट जनों के संकट, त्रस्त जनों के संकट
क्लिक में दूर करे
ॐ जय गूगल हरे…
ॐ जय गूगल हरे, स्वामी जय गूगल हरे…

साभार : http://abhivyakta.wordpress.com/2006/07/20/test-2/